आप जलियांवाला बाग के “हीरो” सैफुद्दीन किचलू साहब के बारे में जानें, पढ़ें और लिखें भी क्योंकि जिस तरह हर एक समाज को आइडल चाहिए होता है, आपको भी चाहिए, सैफुद्दीन साहब उन्हीं आइडल में से एक हैं।
रॉलेट एक्ट के विरोध में पंजाब में सबसे बड़ी आवाज़ की तरह बनकर सैफुद्दीन साहब को उस वक्त धोखे से गिरफ्तार किया गया, जब उन्हें अंग्रेज अफसरों से बातचीत के लिए बुलाया गया था और उनकी गिरफ्तारी के विरोध ही में जलियांवाला बाग़ में लोग जमा हुए, जहां जर्नल डायर ने बरबरियत की सारी हदें पार कर दी थी।
जलियांवाला बाग़ के हीरो के बारे में जानते हैं आप? जिस शख्स ने विदेश से पढ़ाई की,वकील बनें और अमृतसर में वकालत की और अंग्रेजों के खिलाफ़ आजादी की लड़ाई का जिम्मा उठाया।
क्या आप उन्हें जानते हैं? क्या आपने उनके बारे में सुना है? जिन्होने अपनी वकालत तक को आजादी के आंदोलन के लिए छोड़ दिया था।

आप बताइए कितने लोगों में अपने सोशल मिडिया या अखबार में सैफुद्दीन साहब का नाम सुना है, लिखा है या पढ़ा है? पता है ऐसा क्यों?
क्योंकि आप खुद ही खिलाफत आंदोलन के हीरो, आजादी के आंदोलन के हीरो और स्टेलिन प्राइज अवार्ड पाने वाले शख्स को याद नहीं करना चाहते हैं।
सोचिए आपको विनायक सावरकर को लेकर उल्टी सीधी बातें करनी हैं या अपने इतिहास को लेकर बोलना है, समझना है और बात करनी है, फर्क बड़ा है समझ लीजिए।
सैफुद्दीन किचलु साहब को खिराज ए अकीदत..
असद शैख़