बिहार की राजधानी पटना के समनपुरा इलाक़े से निकलने वाला मुहर्रम का अखाड़ा, जिसका इंतज़ार मुख्यमंत्री आवास पर भी हुआ करता था। 90 के दशक के अंत में मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव खलीफा मरहूम अबरार अहमद खान के नेतृत्व वाले समनपुरा अखाड़े में शिरकत कर हर साल अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते थे। तस्वीर में लालू यादव के हाथ में जो तलवार है, वो ख़लीफ़ा ने उन्हें बतौर तोहफ़ा पेश की थी — जो भाईचारे और समनपुरा से उनकी मुहब्बत की निशानी थी। यह तस्वीर समनपुरा के इमामबाड़ा की है, जो अबरार हाउस ग्राउंड में वाक़े था, समनपुरा पटना में। ये वो दौर था जब समनपुरा अखाड़ा पूरे बिहार की मुस्लिम बिरादरी में एक जाना-पहचाना नाम बन गया था, और आज भी इसकी अहमियत क़ायम है। ख़लीफ़ा अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनके नेक काम और क़ौमी यकजहती के लिए की गई खिदमात को हमेशा याद किया जाएगा।
मरहूम अबरार अहमद ख़ान के दो बेटे हैं — नियाज़ अहमद ख़ान और अहरार अहमद ख़ान, बड़े बेटे नियाज़ अहमद ख़ान, लालू यादव के क़रीबी लोगों में से हैं और आरजेडी के जाने-माने सियासतदान हैं। छोटे बेटे अहरार अहमद ख़ान, बिहार में टेक्स्टाइल और तालीमी शोबे के कारोबारी हैं। ख़लीफ़ा अबरार अहमद ख़ान के इंतिक़ाल के बाद भी, लालू यादव समनपुरा आते रहे, ताकि अपने राब्तों और एहतराम को क़ायम रखें।
बाकी उस दौर की कुछ तस्वीरे और भी हैं, जिसमें बड़े बेटे नियाज़ अहमद ख़ान, लालू यादव को पगड़ी पहनाते नज़र आ रहे हैं और उन्हें तलवार सौंप रहे हैं, ताकि वो समनपुरा अखाड़ा में उनके साथ मार्च करें (ये तस्वीरें 2000 के आस-पास की हैं, जिसे अलग से फिर कभी शेयर किया जाएगा)। इस मौक़े पर लालू यादव की मंत्रिमंडल के नामवर मंत्री भी अबरार हाउस, समनपुरा, पटना में मौजूद हैं।
मरहूम अबरार अहमद खान के दो पोते, मोहम्मद काशिफ़ ख़ान और मोहम्मद दानियाल ख़ान, जो दोनों पेशे से इंजीनियर हैं और लालू यादव के बेटों से अपने करीबी संबंधों के लिए जाने जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, मोहम्मद काशिफ तेज प्रताप यादव के स्कूल मित्र भी थे।
इस ख़ानदान के रिश्तेदारों में बिहार सरकार के कुछ मंत्री और एमएलए शामिल हैं.
क्रेडिट – Lost Muslim Heritage of Bihar