केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। यमन की एक अदालत ने निमिषा को फांसी की सज़ा सुनाई है, और अब यह सजा 16 जुलाई को लागू की जा सकती है। इस मामले में भारतीय सरकार और विभिन्न राजनीतिक दल समय रहते दखल देने की कोशिश कर रहे हैं।
निमिषा प्रिया पर साल 2017 में यमन के एक नागरिक की हत्या का आरोप है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक झगड़े के दौरान उस व्यक्ति की जान ले ली। अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी।
इस फैसले को रोकने के लिए भारत सरकार के साथ-साथ कई संगठन और नेता भी सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। सीपीएम सांसद के राधाकृष्णन और जम्मू-कश्मीर की नेता महबूबा मुफ्ती ने भी सरकार से अपील की है कि ब्लड मनी (मुआवजा) का रास्ता निकालकर निमिषा की जान बचाई जाए।
फिलहाल, भारत के सुप्रीम कोर्ट में भी इस मुद्दे पर याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई 14 जुलाई को होनी है। उम्मीद जताई जा रही है कि भारत सरकार इस बीच राजनयिक प्रयासों के जरिए निमिषा प्रिया की सज़ा पर रोक लगवा सकती है।
परिवार और सामाजिक कार्यकर्ता अंतिम समय तक कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह यमन सरकार या मृतक के परिजनों के साथ समझौता हो जाए। यदि ऐसा नहीं होता, तो 16 जुलाई को निमिषा प्रिया को फांसी दी जा सकती है।