भारत पे टोटल कर्ज कितना हुआ - किन छेत्रो के लिए कर्ज लिया गया ?
- भारत का कुल कर्जआंतरिक कर्ज (Domestic Debt): सितंबर 2023 तक, भारत का कुल कर्ज 205 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया था। मार्च 2023 में यह 200 लाख करोड़ रुपये था, यानी छह महीनों में 5 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।
केंद्र सरकार का कर्ज: 161.1 लाख करोड़ रुपये (कुल कर्ज का 46.04%)।
राज्य सरकारों का कर्ज: 50.18 लाख करोड़ रुपये (कुल कर्ज का 24.4%)।
कॉर्पोरेट बॉन्ड: 44.16 लाख करोड़ रुपये (कुल कर्ज का 21.52%)।
राजकोषीय खर्च: 9.25 लाख करोड़ रुपये (कुल कर्ज का 4.51%)।
बाह्य कर्ज (External Debt):सितंबर 2024 तक, भारत का कुल विदेशी कर्ज 711.8 अरब डॉलर (लगभग 59.4 लाख करोड़ रुपये) था, जो जून 2024 की तुलना में 4.3% अधिक है।
मार्च 2024 तक, यह 663.8 अरब डॉलर था, जिसमें पिछले एक वर्ष में 39.7 अरब डॉलर की वृद्धि हुई।
- क्षेत्र-विशिष्ट कर्ज आवंटनकर्ज का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में क्षेत्र-विशिष्ट आवंटन का विस्तृत ब्रेकडाउन सीमित है। निम्नलिखित जानकारी उपलब्ध स्रोतों के आधार पर दी गई है:आंतरिक कर्ज का उपयोग:केंद्र और राज्य सरकारों का खर्च: केंद्र सरकार का कर्ज मुख्य रूप से राजकोषीय घाटे को पूरा करने, बुनियादी ढांचे (सड़क, रेल, बंदरगाह), सामाजिक कल्याण योजनाओं (जैसे मनरेगा, स्वास्थ्य, शिक्षा), और रक्षा क्षेत्र के लिए उपयोग होता है।
राज्य सरकारें अपने कर्ज का उपयोग स्थानीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए करती हैं।
कॉर्पोरेट बॉन्ड: कॉर्पोरेट क्षेत्र में कर्ज का उपयोग व्यवसाय विस्तार, पूंजीगत व्यय, और परिचालन लागतों के लिए किया जाता है। यह विशेष रूप से निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए लिया जाता है।
राजकोषीय खर्च: यह सरकार के दैनिक कार्यों, कर्मचारी वेतन, पेंशन, और अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए उपयोग होता है।
बाह्य कर्ज का उपयोग:वाणिज्यिक ऋण (Commercial Loans): कुल बाह्य कर्ज का 33.7% हिस्सा वाणिज्यिक ऋणों का है, जो मुख्य रूप से निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा परियोजनाओं (जैसे ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, और विनिर्माण) के लिए लिया जाता है।
मुद्रा और जमा (Currency and Deposits): यह 23.1% हिस्सा है, जो अनिवासी भारतीयों (NRI) के डिपॉजिट्स और अन्य वित्तीय साधनों से संबंधित है।
व्यापार ऋण और अग्रिम (Trade Credit and Advances): 18.3% हिस्सा, जो आयात-निर्यात गतिविधियों और व्यापार-संबंधी वित्तपोषण के लिए उपयोग होता है।
ऋण प्रतिभूतियां (Debt Securities): 17.2% हिस्सा, जो बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और अन्य दीर्घकालिक निवेशों के लिए उपयोग होता है।
विशिष्ट परियोजनाएं:विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (ADB) से लिए गए कर्ज का उपयोग MSME (लघु, छोटे और मध्यम उद्यम), शिक्षा सुधार, और स्वास्थ्य क्षेत्र में किया गया है। उदाहरण के लिए, 2020 में विश्व बैंक ने MSME के लिए 75 करोड़ डॉलर और शिक्षा सुधार के लिए 3,700 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था।
- प्रति व्यक्ति कर्जसितंबर 2024 तक, भारत की जनसंख्या (लगभग 1.4 अरब) के आधार पर प्रति व्यक्ति विदेशी कर्ज लगभग 5 डॉलर (430 रुपये) है।
कुल आंतरिक और बाह्य कर्ज combined रूप से प्रति व्यक्ति कर्ज का अनुमान लगाना जटिल है, लेकिन कुछ स्रोतों के अनुसार, 2021 में यह लगभग 30,776 रुपये प्रति व्यक्ति था।
- कर्ज का जीडीपी अनुपातसितंबर 2024 में विदेशी कर्ज और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का अनुपात 19.4% था, जो जून 2024 में 18.8% था।
मार्च 2024 में, कुल बाह्य कर्ज का जीडीपी अनुपात 18.7% था, जो पिछले वर्ष 19% था।
- महत्वपूर्ण टिप्पणियांभारत का विदेशी कर्ज मुख्य रूप से दीर्घकालिक (79.4%) है, जो अर्थव्यवस्था पर कम दबाव डालता है।
विदेशी मुद्रा भंडार कुल बाह्य कर्ज का लगभग 92.6% है, जो भारत की कर्ज चुकाने की क्षमता को दर्शाता है।
कर्ज में वृद्धि के बावजूद, भारत का जीडीपी अनुपात अन्य मध्यम आय वाले देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।
स्रोत और सीमाएंयह जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डेटा पर आधारित है।