*दिवाली की बदलती तस्वीर: *परंपरा से आधुनिकता की ओर*
दीपावली, प्रकाश, समृद्धि और एकता का पर्व, भारत में हर साल अपार उत्साह और उमंग के साथ पूरे देश में मनाया जाता है। यह त्योहार न केवल अंधेरे पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है, बल्कि यह परिवारों, समुदायों और रिश्तों को जोड़ने का एक अनमोल अवसर भी होता हैं । दीपावली के दीयों, रंगोली, मिठाइयों और आतिशबाजी से सजी रातें भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। लेकिन आधुनिक युग में, महंगाई, पर्यावरणीय चिंताएँ और राजनीतिक बदलावों ने दीपावली के स्वरूप को एक नया रंग दे दिया है। बावजूद इसके दीपावली की जीवंतता और परंपराएँ आज भी उतनी ही प्रबल हैं। यह लेख दीपावली की तैयारियों, उत्सव कीरौनक और आधुनिक चुनौतियों के बीच इसके बदलते स्वरूप को प्रस्तुत करता है।
दीपावली की तैयारियाँ घर की साफ-सफाई से शुरू होती हैं, जो न केवल स्वच्छता का प्रतीक है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है। घरों को रंगोली, दीयों और फूलों से सजाया जाता है, जो इस पर्व की आत्मा हैं। लेकिन डिजिटल युग और व्यस्त जीवनशैली ने इस प्रक्रिया को प्रभावित किया है। आज लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से सजावटी सामान जैसे एलईडी लाइट्स, रंग-बिरंगे लैंप और रेडीमेड रंगोली स्टिकर्स खरीद रहे हैं। लोगों के पास समय की कमी के कारण रेडीमेड डिज़ाइन और स्टencils का चलन बढ़ गया है। महंगाई ने सजावटी सामानों और रंगों की कीमतों को बढ़ाया है, फिर भी, दीयों और रंगोली से सजा आंगन दीपावली की रौनक को बरकरार रखता है।
दीपावली का नाम दीयों से है, और मिट्टी के दीये इस त्योहार का दिल हैं। ये दीये प्रकाश, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक हैं। लेकिन महंगाई ने दीयों से घर सजाने की परंपरा को थोड़ा प्रभावित भी किया है ।तेल, घी और दीयों की कीमते बढ़ी है, जिसके चलते कई परिवार अब इलेक्ट्रिक लाइट्स और एलईडी स्ट्रिप्स का उपयोग कर रहे हैं। जो सस्ती और आकर्षक हैं, साथ ही आसानी से बाज़ार में उपलब्ध हैं। आज , पर्यावरण के प्रति लोगों में बढ़ती जागरूकता ने दीपावली के स्वरूप में अधिक बदलाव किया है। लोग अब पर्यावरण-अनुकूल दीये और कम बिजली की खपत वाली लाइट्स लेना पसंद कर रहे हैं। कई राज्यों में आतिशबाजी पर प्रतिबंध हैं या समय सीमा लागू हैं, इससे ग्रीन पटाखों की मांग बढ़ी है, जो कम प्रदूषण फैलाते हैं। यह बदलाव दीपावली को पर्यावरण के साथ जोड़ने का एक सकारात्मक प्रयास है।
दीपावली पर मिठाइयाँ और उपहार रिश्तों को मधुर बनाने का एक खास हिस्सा हैं। गुझिया, लड्डू और बर्फी इस पर्व की शान हैं। लेकिन चीनी, घी और मेवों की बढ़ती कीमतों ने घर में मिठाइयाँ बनाने की परंपरा को कम किया है। लोग अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या स्थानीय दुकानों से मिठाई खरीदते हैं। उपहारों का आदान-प्रदान भी डिजिटल हो गया है, जहाँ लोग ऑनलाइन गिफ्ट कार्ड्स, कूपन और गिफ्ट हैम्पर्स भेज रहे हैं। इतने बदलावों के बावजूद, दीवाली पर यह परंपरा रिश्तों को मजबूत करने का एक सुंदर माध्यम बनी हुई है।
आतिशबाजी दीपावली की रात की असली रौनक होती है। चकरी, फुलझड़ियाँ और अनार बच्चों और बड़ों को समान रूप से आकर्षित करते हैं। लेकिन इससे होने वाला प्रदूषण और शोर एक विवादास्पद मुद्दा बन गया है। कई शहरों और राज्यों में आतिशबाजी पर प्रतिबंध या समय सीमा लागू है। ग्रीन पटाखे, जो कम प्रदूषण फैलाते हैं, अब लोकप्रिय हो रहे हैं, हालाँकि वे बहुत महगें हैं। ऑनलाइन मार्केट्स ने इनकी उपलब्धता को भी बढ़ाया है। यह बदलाव सुरक्षा और पर्यावरण के प्रति लोगों की जागरूकता को दर्शाता है।
दीपावली में नए कपड़े पहनना समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है। लोग साड़ियाँ, लहंगे और कुर्ते खरीदते हैं, और ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स इस प्रक्रिया को आसान बना रहे हैं। महंगाई के कारण लोग डिस्काउंट और ऑफर्स का इंतजार करते हैं। लक्ष्मी-गणेश की पूजा के दौरान नए कपड़े पहनकर परिवार एकजुट होते हैं, और यह परंपरा आज भी है।
दीपावली का उत्सव भारतीय संस्कृति की एकता को दर्शाता है। लोग मिठाइयाँ और शुभकामनाएँ बाँटकर इस पर्व को मनाते हैं। लेकिन राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों ने इसे प्रभावित किया है। कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में राजनीतिक रंग भी देखने को मिलता है। सोशल मीडिया ने दीपावली को वैश्विक मंच पर ले जाकर इसकी रौनक को बढ़ाया है। लोग अपनी रंगोली, सजावट और उत्सव की तस्वीरें साझा करते हैं, जो इस पर्व को विश्वव्यापी बनाता है।
२० अक्टूबर २०२५ की दीपावली न केवल प्रकाश और खुशियों का उत्सव होगी, बल्कि यह परंपरा और आधुनिकता के संगम का प्रतीक भी होगी। महंगाई, पर्यावरणीय जागरूकता और राजनीतिक बदलावों के बीच भी दीपावली अपनी जीवंतता बरकरार रखे हुए है। यह पर्व हमें सिखाता है कि चुनौतियों के बावजूद, परंपराओं को अपनाकर और प्यार व प्रकाश की शक्ति से हम परिवार, समाज और देश को एक रख सकते हैं। इस दीपावली, अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर दीयों की रोशनी और खुशियों को साझा करें, और इस पर्व की आत्मा को जीवंत रखें।
शुभ दीपावली!
Sanyukt Deshmukh founder president Sudarshana Foundation