उत्तर प्रदेश के ज़िले हापुड़ के गांव बहादुरगढ़ में 8 अगस्त को खुर्शीद उर्फ आरिश खान की गोली लगी पास में ही उसकी लाइसेंस पिस्टल पड़ी थी, परिवार वाले जब अस्पताल ले जा रहे थे ,जाते समय ही मौत हो गई। लेकिन मामला यहीं नहीं रुकता है आए इस मामले को पूरी तरह से जानते है कि क्या हुआ उस रात ?
खुर्शीद खान उर्फ आरिश मुहम्मदपुर का रहने वाला है, जो अपने घर का एक इकलौता बेटा था उसके घर में उसकी बहन और मां का लाडला आरिश था। मां को हमेशा से अरमान था कि उनके बेटे की शादी एक पढ़ी लिखी और अखलाक की लड़की से हो।क्योंकि ख़ुर्शीद ख़ुद भी एक पढ़ा लिखा नौजवान और कारोबारी था
आरिश की शादी फरवरी में सिवारा बिजनौर के रहने वाले सुहैल साहब की बेटी रहीमा की साथ तय पाई गई। लेकिन लड़की वालों को शादी की जल्दी थी ख़ुर्शीद का परिवार इस बात को तब समझ नहीं पाया इसलिए उन्होंने बिना मगनी किए ही 25 अप्रैल 2025 को शादी की तारीख रख दी। और घर वाले ने अपने बेटे की शादी मुस्लिम रीति रिवाज के तहत बिजनौर में धूम – धाम से की।
लेकिन मां का कहना है कि कुछ महीने से बहु और बेटे में अनबन होने लगी जिसकी वजह से मेरा बेटा टेंशन में रहता था , और हमसे बात शेयर नहीं करता था। इसी अनबन के कारण बहु और बेटे में झगड़ा होता था। कमरे से बहस की आवाज़ भी आती थी। मेरा बेटा काफी परेशान था। लेकिन शुक्रवार की रात को मेरे बेटे के साथ ऐसा हादसा हो जाएगा ये कभी नहीं सोचा था।
शुक्रवार की रात क्या हुआ आए जानते है
मृतक की मां के ज़ुबानी
शाम को मेरे बेटे और बहु के बीच कोई बहस हुई थी जिसके बाद मैं और मेरी बेटी अपने कमरे में थे। 12:00 बजे हमें ज़ोर से गोली चलने की आवाज़ आई, फौरन मैं और मेरी बेटी भागकर कमरे तक पहुंचे लेकिन कमरा बंद था, हमने दरवाज़ा बजाया जिसके बाद बहु ने गेट खोला तो मैंने देखा मेरा बेटा ज़मीन पर लहूलुहान पड़ा था, जिसको देख कर मैं और मेरी बेटी की चीख निकली और हम उसी समय मदद के लिए पड़ोसियों के पास गए। उस बीच बहु मेरे बेटे के पास थी, हम आनफन मे मेरठ के आनंद हॉस्पिटल में अपने ज़ख्मी बेटे को लेकर पहुंचे । जिसे डॉक्टर ने मृतक घोषित कर दिया। उसी दौरान मेरे बेटे के ससुराल वाले वहां आ गए। समधी और समधन ने खानदान की बदनामी होगी इसका हवाला देते हुए पुलिस कार्यवाही करने से मना कर दिया।
आगे मृतक की मां का कहना है कि जब हम अपने बेटे को घर वापस ला रहे थे उस समय बहु के घर वालों ने बहु को अपने साथ रखा और अलग कार में बैठाया। घर आने के बाद मेरे सारे रिश्तेदार घर आ गए लेकिन बहु और उसके परिजनों ने कमरे में लगे खून के निशान साफ कर दिए। बहु ने अपने खून में साने कपड़ों को कही फिकवा दिया। मैं और मेरी बेटी इतने ज्यादा गम में थे कि हमें क्या करना चाहिए ये समझ नहीं आया। लेकिन पुलिस ने पोस्टमार्टम में मेरे बेटे की हत्या को आत्महत्या बताया। जिसके बाद ये बात दब सी गई।
लेकिन उसके बाद चीज़ें खुल कर सामने आने लगी जैसे मेरी बहु ने मेरे बेटे के फोन व प्रॉपर्टी के कागज़ात को ज़ब्त कर लिया अब क्योंकि ख़ुर्शीद के पास एक 70 बीघा ज़मीन है और चाचा के कोई औलाद ना होने की वजह से उनकी भी प्रॉपर्टी उसके ही हिस्से में थी वो सब कागजात बहू ने अपने पास रख लिए जिसके बाद मेरी उस से बहस हुई और उसी दौरान मुझसे बदतमीजी की ।बहू के इस रवैये से बड़ी साजिश की आशंका है, जिसके बाद मृतक की मां ने 9 दिन बाद बहादुरगढ़ थाने में पुलिस को तहरीर दी जिसमें पुत्रवधू पर हत्या का आरोप लगाया और न्याय की गुहार लगाई। लेकिन प्रशासन से कोई FIR दर्ज नहीं की। जिसके बाद से परिजनों ने व ग्रामीणों में एक आक्रोश जताया है। लेकिन मामला में अभी तक कोई करवाई नहीं हुई है। सवाल ये है जितना संगीन ये मामला है उसमें प्रशासन की तरफ से ढील दी जा रही है। इस से पता लगता है कि समाज में इस तरह की बढ़ती घटनाओं से लोगों में प्रशासन से भरोसा तो उठ रहा है। बढ़ते अपराध की घटना ने एक डर का माहौल पैदा किया है। लेकिन एक मां का बेटा उस से जुदा हो गया जिसके लिए वो एक निष्पक्ष जाँच की मांग कर रही है।