भारत के मुसलमान उलेमा जिन्होंने हिंदू नर्स को फांसी से बचा लिया।
केरल की भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में अपने बिज़नेस पार्टनर की हत्या मामले में 16 जुलाई को फांसी की सज़ा दी जानी थी। मंगलवार को फांसी की सज़ा को यमन सरकार ने टाल दिया। लेकिन कैसे? आइए जानते हैं।
शेख अबूबक्र अहमद कौन हैं और वो ‘ग्रैंड मुफ्ती’ कैसे बने? शेख अबूबक्र अहमद, जिन्हें कंथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार के नाम से भी जाना जाता है, फरवरी 2019 में “ग्रैंड मुफ्ती ऑफ इंडिया” चुने गए थे। यह पद उन्हें ऑल इंडिया तंजीम उलमा-ए-इस्लाम नाम की संस्था ने दिया, जो देशभर के सुन्नी मुस्लिम उलेमाओं की एक बड़ी संस्था है।
वो केरल के कोझिकोड जिले के कंथापुरम गांव में पैदा हुए थे। उन्होंने इस्लामी शिक्षा, समाज सेवा और धार्मिक मामलों में लंबे समय तक काम किया है। शेख अबूबक्र अहमद ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलेमा और सम्सथा केरला जेम-इय्यथुल उलेमा जैसे बड़े मुस्लिम संगठनों के महासचिव भी हैं।
उनका “ग्रैंड मुफ्ती” बनना एक ऐतिहासिक मौका था, क्योंकि यह पद आमतौर पर उत्तर भारत के उलेमा को मिलता रहा है, लेकिन शेख साहब ने दक्षिण भारत से होते हुए यह सम्मान हासिल किया। यह पद जितना महत्वपूर्ण है , उतना ही देश के मुसलमानों के बीच इसका बड़ा असर होता है।
उनकी धार्मिक पहचान और संस्थाओं से जुड़ाव क्या है?
शेख अबूबक्र अहमद के आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वह मारकज़ु सक़ाफ़ति सुन्नियिया (जामिआ मारकज़) के संस्थापक और चांसलर हैं। यह संस्था 1978 में केरल में शुरू की गई थी। जो आज के वक्त में एक बड़ा नेटवर्क बन चुका है जिसमें कई स्कूल, चैरिटी संगठन और समाज सेवा जैसी चीजों से शामिल हैं।
शेख अबूबक्र अहमद ने भारत के मुस्लिम विद्वानों की ओर से कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिस्सा लिया है, जैसे कि संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूनेस्को (UNESCO) के प्रोग्राम। वो मज़हब के बीच शांति और समझ बढ़ाने वाले कई वैश्विक सम्मेलनों में भी हिस्सा लेते रहते हैं। उन्होंने इंटरनेशनल पीस कॉन्फ्रेंस और मारकज़ द्वारा चलाए जा रहे ग्लोबल कार्यक्रमों के ज़रिए शिक्षा, इस्लामी शिक्षा और समाज की भलाई के लिए लगातार काम किया है।
कैसे उन्होंने मदद की आइए जानते है।
हिंदुस्तान के ग्रैंड मुफ्ती शेख़ अबूबक्र अहमद ने यमन के प्रमुख स्कॉलर शेख़ उमर बिन हाफ़िज़ से बात की और उनसे तलाल अब्दुल मेहंदी के परिवार के मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
इस्लामिक कानून में दिए गए बल्ड मनी (मुआवज़ा देकर माफी) के ज़रिए पीड़ित परिवार से माफी पाने की कोशिश की जा सके।
निमिषा प्रिया को बचाने की आखिरी कोशिश में, अबूबकर मुसलियार ने तलाल महदी के परिवार से अपील की है कि वे उसे माफ कर दें। चूंकि उसकी फांसी अब बहुत करीब है, उसका भविष्य अब इस पर टिका है कि पीड़ित का परिवार क्या उसे माफ करता है और 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8 करोड़ रुपये) का दिया (ब्लड मनी) स्वीकार करता है या नहीं।
अबूबकर मुसलियार के करीबी लोगों का मानना है कि यमन के मशहूर स्कॉलर हबीब उमर का समाज में बहुत सम्मान है, और उनकी बातों का असर हो सकता है। उम्मीद की जा रही है कि उनके जरिए निमिषा के लिए कोई अच्छा फैसला निकल सकता है।