इतिहासकारों के मुताबिक दिल्ली से लूटे हहुए माल को ईरान ले जाने के लिए नादिर शाह को सैंकड़ों ऊंट, घोड़े और हाथियों का इस्तेमाल किया था।
नादिर शाह 1739 में दिल्ली पर हमला वर हुआ उस वक्त हिंदुस्तान दुनिया का अमीर तरीन देश था औरंगज़ेब के दौर तक हिंदुस्तान दुनिया की कुल पैदावार का 27 फीसद पैदा करता था जबकी आज की तारीख में अमेरिका कुल पैदावार का 25 फीसद पैदा करता है इसी दौर में भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था
1736 में जब नादिर शाह ईरान का बादशाह बना तब मोहम्मद शाह रंगीला को दिल्ली का तख्त संभाले हुए 17 साल गुज़र चुके थे 1737 में नादिर शाह ने अपना एक सफ़ीर मुगल दरबार में भेजा जिसका मकसद बागी अफ़ग़ान सरदारों को दिल्ली में पनाह देने से रोकना था।
लेकिन मोहम्मद शाह ने कई महीनो तक ईरानी सफ़ीर को मिलने का वक्त ही नहीं दिया और जब बुलाया भी तो तोहीन आमेज़ सुलूक किया उधर नादिर शाह बागियों की कुचलता हुआ कंधार फतेह कर चुका था मुगल दरबार में अपने सफीर की बेइज़्ज़ती की ख़बर सुनकर आगबबुला हुआ उसने दिल्ली पर चढ़ाई का फैसला किया रास्ते में जो शहर गांव आए उजाड़ता चला गया।
मुगलो ने कर्नाल के मैदान को जंग के मैदान के लिए चुना नादिर शाह के मुकाबले मुगलों के पास दोगुनी फौज थी।
24 फरवरी 1739 को जंग हुई और महज़ चंद घंटो में नादिर शाह की फौज ने हज़ारों मुगल फौजियों को ठिकाने लगा दिया और फौज ने हथियार डाल दिए।

Lorene Lock heart अपनी किताब नादिर शाह में लिखता है नादिर शाह का इरादा करनाल से ही वापस लौटने का था लेकिन उसके कमांडरों ने मुगल फौज की खस्ता हालत देखकर उसे मश्विरा दिया की अगर पर चढ़ाई करते है तो बहुत ज़्यादा माल दौलत हाथ आएगा।
20 मार्च को जब नादिर शाह एक फातेह की शक्ल में दिल्ली में दाखिल हुआ तो उसका श्याम ए शान इस्तक़बाल हुआ, 100 हाथी इसके जुलूस की कयादत कर रहे थे और हर हाथी पर इसके खास दस्ते तैनात थे।
शाही क़िले में तोप के गोले से इस्तक़बाल हुआ अगले दिन ईद उल अज़्हा का दिन था दिल्ली की मस्जिदों में ईद का खुतबा नादिर शाह के नाम का पढ़ा गया शाम को नादिर शाह, मोहम्मद शाह को ईद की मुबारकबाद देने शाही क़िले में पहुंचा।
इस दौरान अफ़वाह फैल गई की क़िले में नादिर शाह को क़त्ल कर दिया गया अफवाह फैलते ही शहर में नादिर शाह के सिपाहियों का क़त्ल ए आम शुरू हो गया मोहम्मद शाह के मंसबदारो और उमरा ने भी इस कत्ल ओ गारत को रोकने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई रात भर में तकरीबन सात हजार फौजी हलाक कर दिये गए।
अगली सुबह जब नादिर शाह अपने मुहाफ़िज़ो के साथ इस सूरत ए हाल का जायज़ा लेने निकला तो चांदनी चौक में किसी ने उसपर फायर कर दिया फायरिंग में उसका एक ओहदे दार मारा गया।
नादिर शाह ने जामा मस्जिद की छत से ऐलान किया की जिस भी मोहल्ले में इसका एक भी फौजी मारा गया हो वहां कोई भी शहरी ज़िंदा नहीं बचना चाहिये ।
इस क़त्ल ए आम मे कितने शहरी मारे गए इसका अंदाज़ा किसी को नहीं इतिहासकार बीस हजार से चार लाख तक की तादाद बताते हैं।
क़त्लो गारत के बाद लूट पाट का दौर शुरू हुआ लूट का माल इतना ज़्यादा था की नादिर शाह ने ईरान पहुंच कर तीन साल तक के लिए आवाम से टैक्स माफी का ऐलान कर दिया, इतिहासकारों ने मोटा मोटा हिसाब कुछ इस तरह लिखा है.
हीरे जवाहिरात की क़ीमत 25 करोड़ इंडियन रुपिये।
तख़्त ए ताऊस 9 करोड़ रुपिये।
सोने चांदी के सिक्के बर्तन तकरीबन तीस करोड़ रुपिये।
दीगर घरेलू सामान और हथियार तकरीबन एक करोड़ रुपिये।
ये सब मिलाकर उस दौर के कुल तकरीबन 70 करोड़ इंडियन रुपिये बनते थे जो की आज के कई छोटे मोटे देशो की जीडीपी से भी ज़्यादा थे।
शोएब गाज़ी