“उसने दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद बनवाई लेकिन खुद को एक बेनाम कब्र में दफ़नाया जाना चुना” ये उस शख्स का इंट्रोडक्शन है जिसके बारे में सबसे ज़्यादा ज़ुल्म की कहानियां अक्सर सुनाई जाती हैं। औरंगजेब 50 साल तक दिल्ली की गद्दी पर बादशाहत करते रहें और इस बीच उनका शासन सही और गलत हर बादशाह की तरह इतिहास में दर्ज होता रहा।
बचपन से लेकर आजतक जिस बादशाह के बारे में सबसे ज़्यादा अफवाहें सुनी हैं वो औरंगजेब ही हैं, हालांकि इतिहास का छात्र होने की वजह से इतना ज़रूर समझ चुका हूं कि बादशाह को सिर्फ बादशाह समझना चाहिए, अगर औरंगजेब को लेकर ये धारणा है कि उसने अपने बाप से सत्ता हथियाई तो क्या ऐसे और कई उदाहरण नहीं है क्या इतिहास मे ?
लेकिन औरंगजेब मेन एंड मिथ्स आपको दो तरफा कहानी बताती है। यानी अगर आप औरंगजेब को “हीरो” जैसी शख्सियत मानते हैं तो आपको ये गलत साबित करती है और अगर आप औरंगजेब को “विलेन” मानते हो तो भी आप गलत ही साबित होंगें… क्यूंकि किसी भी शासक में बुराई और अच्छाई होना लाज़मी है… वो होनी भी चाहिए।

कुछ दिन पहले ये किताब जब मंगवाई थी तो शायद इतना नहीं सोचा था लेकिन वाक़ई… गुजरात मे पैदा होकर दक्कन में इंतेक़ाल कर जाने वाला ये बादशाह जिसने सारी उम्र खुद को “कट्टर” साबित किया तो उसने अपनी कब्र को एक सूफी की कब्र के कदमों में होना चुना,बहुत सारी कहानियों को खुद में समेटे हुए हैं जहां ये गलत भी है और सही भी है अच्छा भी है और बुरा भी है।
बहरहाल इस 150 के करीब पेज वाली किताब को पढ़ने के बाद ये पता चला है कि अभी बादशाह औरंगजेब को और पढ़ना होगा… तब शायद कुछ नया और जरूरी ज़हन में बैठे… बाकी अगर आपको औरंगजेब को लेकर अपने तथ्यों और अपनी सोच को सही से गलत और गलत से सही करना है तो इस किताब को पढ़ जाइए।