हाल ही में उत्तराखंड की चर्चित आईपीएस अधिकारी रचिता जुयाल के इस्तीफे ने न केवल राज्य के पुलिस महकमे में हलचल पैदा की है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है — क्या एक ईमानदार और कर्मठ अधिकारी इस सिस्टम में टिक नहीं सकता
ईमानदारी का दंड
रचिता जुयाल, 2015 बैच की आईपीएस अधिकारी, जिनका सेवा रिकॉर्ड शानदार रहा है — चाहे बात कोविड काल की हो, जनता से सीधा संवाद हो या विजिलेंस में सटीक कार्रवाई की। हाल ही में उन्होंने अपनी टीम के साथ आईएसबीटी चौकी इंचार्ज को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। इस कार्रवाई को जनता और मीडिया दोनों ने सराहा, लेकिन इसके तुरंत बाद ही उन्होंने “व्यक्तिगत कारणों” का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया

सवाल उठता है — क्या ये सिर्फ व्यक्तिगत कारण हैं, या सिस्टम की जवाबदेही से जुड़ा कोई बड़ा दबाव क्या उनकी कार्रवाई से कोई ऊपरी स्तर पर असहजता हुईसिस्टम के भीतर का असहज सचदेश के कई राज्यों में ईमानदार और ज़मीन से जुड़े अधिकारियों को या तो हटा दिया गया या उन्हें किनारे कर दिया गया। रचिता जुयाल का इस्तीफा भी उसी कड़ी का हिस्सा लगता है। ईमानदार अफसर जब भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती दिखाते हैं तो उन्हें समर्थन के बजाय तनाव ट्रांसफर या इस्तीफा ही मिलता है’पर्सनल रीजन’ या पब्लिक सिस्टम की विफलताहर बार जब कोई अफसर इस्तीफा देता है वह यही कहता है — व्यक्तिगत कारणों से। यह वाक्य एक ढाल बन चुका है — असल वजहों को छुपाने के लिए। क्योंकि अगर वे खुलकर बोलें तो उन्हें नौकरी के बाद भी कीमत चुकानी पड़ सकती है
क्या यह केवल उत्तराखंड की कहानी है- नहीं
कर्नाटक में डीसी अफसर का ट्रांसफर
यूपी में एसडीएम द्वारा भूमि घोटाले पर कार्रवाई करने पर निलंबन
बिहार में ईमानदार डीएसपी को पोस्टिंग से वंचित रखा जाना
देश भर में सैकड़ों उदाहरण हैं जहां सिस्टम ने अपने सबसे अच्छे लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया
रचिता जुयाल का इस्तीफा सिर्फ एक अफसर की व्यक्तिगत कहानी नहीं है बल्कि यह हमारे पूरे प्रशासनिक ढांचे पर एक गंभीर टिप्पणी है
जब ईमानदार अफसर हार मानने लगें तो समझिए कि सिस्टम बीमार है
यदि सरकारें वाकई पारदर्शिता और जवाबदेही चाहती हैं तो उन्हें ऐसे अधिकारियों को संरक्षण देना होगा न कि उन्हें अकेला छोड़ देना
क्या आप मानते हैं कि हमें ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा और हौसला बढ़ाने के लिए अलग कानून या प्रणाली बनानी चाहिए आपकी राय जानना चाहेंगे