मराठा साम्राज्य का गौरव: छत्रपती शिवाजी महाराज के 12 किलों का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मराठा साम्राज्य की वैश्विक मान्यता
छत्रपती शिवाजी महाराज के पराक्रमी और दूरदर्शी नेतृत्व में स्थापित मराठा साम्राज्य के 12 किलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में ‘विशिष्ट सार्वभौमिक मूल्य’ (Outstanding Universal Value) के रूप में स्थान प्राप्त हुआ है। यह घटना भारतीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर की वैश्विक मान्यता का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इन किलों में महाराष्ट्र के 11 किले—रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, पन्हाला, शिवनेरी, लोहगढ़, साल्हेर, सिंधुदुर्ग, विजयदुर्ग, सुवर्णदुर्ग, खांदेरी और तमिलनाडु का जिंजी किला शामिल हैं। ये किले मराठा साम्राज्य की सैन्य शक्ति, रणनीति और स्थापत्य कौशल के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। यूनेस्को की 47वीं विश्व धरोहर समिति की बैठक (पेरिस, फ्रांस, 11 जुलाई 2025) में ‘मराठा सैन्य परिदृश्य’ (Maratha Military Landscapes) की अवधारणा के तहत इन किलों को मान्यता दी गई।
यूनेस्को विश्व धरोहर सूची और मराठा सैन्य परिदृश्य
मराठा सैन्य परिदृश्य की अवधारणा 17वीं से 19वीं शताब्दी के दौरान मराठा साम्राज्य द्वारा विकसित किलों की रणनीतिक और स्थापत्य विशेषताओं पर आधारित है। सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाओं से लेकर कोकण तट और पूर्वी घाट तक फैले ये किले मराठा स्वराज्य के संघर्ष के प्रतीक हैं। यूनेस्को के मानदंड (iv) और (vi) के तहत इन किलों को उनके स्थापत्य कौशल, तकनीकी प्रगति और सांस्कृतिक मूल्यों के लिए मान्यता प्राप्त हुई। इन किलों में से आठ किले—शिवनेरी, लोहगढ़, रायगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग, सिंधुदुर्ग और जिंजी—भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में हैं, जबकि साल्हेर, राजगढ़, खांदेरी और प्रतापगढ़ महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय के अधीन हैं।
छत्रपती शिवाजी महाराज (1630-1680) मराठा साम्राज्य के संस्थापक और स्वराज्य के प्रणेता थे। उन्होंने सह्याद्री के दुर्गम भू-भाग और कोकण तट का उपयोग कर किलों का एक अभेद्य नेटवर्क स्थापित किया। ये किले केवल रक्षात्मक संरचनाएँ नहीं थे, बल्कि मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक, सैन्य और नौसैनिक शक्ति के केंद्र थे। शिवाजी महाराज ने इन किलों का उपयोग मुगलों, आदिलशाही, निजामशाही और विदेशी ताकतों के खिलाफ युद्ध में रणनीतिक आधार के रूप में किया। ‘माची’ नामक स्थापत्य संरचना, गुप्त प्रवेश द्वार, जटिल किलेबंदी और भौगोलिक लाभों का उपयोग इन किलों को मराठा स्थापत्य कौशल का प्रतीक बनाता है। नीचे प्रत्येक किले की विस्तृत जानकारी और शिवाजी महाराज से उनका संबंध दिया गया है।
1. शिवनेरी किला (पुणे, महाराष्ट्र)
शिवनेरी पुणे जिले के जुन्नर के पास सह्याद्री पर्वत श्रृंखला में स्थित एक पहाड़ी किला है। यह किला छत्रपती शिवाजी महाराज के जन्मस्थान (19 फरवरी 1630) के रूप में प्रसिद्ध है। मजबूत किलेबंदी और रणनीतिक स्थिति के कारण यह किला मराठों के लिए महत्वपूर्ण था। शिवाजी महाराज के पिता शहाजी भोसले ने निजामशाही के दौरान इस किले पर कब्जा किया था। शिवाजी महाराज का बचपन इसी किले पर बीता, और यहाँ के दुर्गम भू-भाग ने उन्हें सैन्य रणनीति और युद्ध कौशल सीखने की प्रेरणा दी। किले पर शिवाईदेवी मंदिर है, जिसे शिवाजी महाराज की माँ जिजाबाई ने बनवाया था। यह किला स्वराज्य की शुरुआत का प्रतीक है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है।
2. रायगढ़ किला (रायगढ़, महाराष्ट्र)
रायगढ़ मराठा साम्राज्य की राजधानी और शिवाजी महाराज का मुख्य किला था। सह्याद्री पर्वत श्रृंखला में स्थित यह पहाड़ी किला मजबूत रक्षा और रणनीतिक स्थिति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ 6 जून 1674 को शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ, जिसके बाद उन्हें ‘छत्रपती’ की उपाधि मिली। 1648 में शिवाजी महाराज ने इस किले पर कब्जा किया और इसका जीर्णोद्धार किया। यहाँ से उन्होंने कई युद्धों की योजना बनाई और मराठा साम्राज्य का विस्तार किया। किले पर जगदीश्वर मंदिर और शिवाजी महाराज का समाधि स्थल है। ‘माची’ स्थापत्य और ASI का संरक्षण इसे मराठा इतिहास का प्रतीक बनाता है।
3. राजगढ़ किला (पुणे, महाराष्ट्र)
राजगढ़ सह्याद्री पर्वत श्रृंखला में स्थित एक पहाड़ी किला है, जो मराठा साम्राज्य की पहली राजधानी थी। 1646 में शिवाजी महाराज ने इस किले पर कब्जा किया और इसे स्वराज्य का केंद्र बनाया। यहाँ से उन्होंने कई अभियानों की योजना बनाई। सुवेला माची, पद्मावती माची और बाले किला जैसी किलेबंदी के कारण यह किला रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था। राजगढ़ स्वराज्य के प्रारंभिक चरण का प्रतीक है और महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है।
4. प्रतापगढ़ किला (सातारा, महाराष्ट्र)
प्रतापगढ़ सातारा जिले के सह्याद्री के जंगल में स्थित एक पहाड़ी-जंगली किला है। 1659 में यहाँ हुई प्रतापगढ़ की लड़ाई में शिवाजी महाराज ने आदिलशाही के सेनापति अफजल खान को पराजित किया। 1656 में शिवाजी महाराज ने इस किले का निर्माण किया। इस लड़ाई ने मराठा स्वराज्य की ताकत को विश्व के सामने प्रदर्शित किया। किले पर भवानी माता मंदिर है, जिसे शिवाजी महाराज ने बनवाया। रणनीतिक जंगल और पहाड़ी भू-भाग के कारण यह किला मराठों के लिए महत्वपूर्ण था। यह किला महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है।
5. पन्हाला किला (कोल्हापुर, महाराष्ट्र)
पन्हाला कोल्हापुर के पास सह्याद्री के पठार पर स्थित एक पहाड़ी-पठारी किला है। 1659 में शिवाजी महाराज ने इस किले पर कब्जा किया। 1660 में आदिलशाही की सेना ने पन्हाला को घेर लिया, लेकिन शिवाजी महाराज ने रात के समय बारिश का लाभ उठाकर किले से निकलकर भाग निकले, जिसे ‘पन्हाला की नाकाबंदी’ के रूप में जाना जाता है। सज्जा कोट और अंधारी बाव जैसी किलेबंदी के लिए यह किला प्रसिद्ध है। यह किला ASI द्वारा संरक्षित है।
6. लोहगढ़ किला (पुणे, महाराष्ट्र)
लोहगढ़ पुणे जिले में स्थित एक पहाड़ी किला है, जो अपनी मजबूत संरचना और सह्याद्री के दुर्गम भू-भाग में स्थिति के लिए प्रसिद्ध है। 1648 में शिवाजी महाराज ने इस किले पर कब्जा किया। इस किले का उपयोग मराठा सैन्य अड्डे और खजाने की सुरक्षा के लिए किया गया। लोहगढ़ और पास का विसापुर किला पुणे क्षेत्र में मराठों का नियंत्रण बनाए रखने में महत्वपूर्ण थे। विनायक दरवाजा और गणेश दरवाजा जैसी संरचनाएँ इसे महत्वपूर्ण बनाती हैं। यह किला ASI द्वारा संरक्षित है।
7. साल्हेर किला (नासिक, महाराष्ट्र)
साल्हेर नासिक जिले में सह्याद्री पर्वत श्रृंखला में स्थित एक पहाड़ी किला है। 1672 में शिवाजी महाराज ने इस किले पर कब्जा किया। मुगलों के खिलाफ लड़ाई में यह किला मराठों की उत्तरी मोहिमों में महत्वपूर्ण था। सह्याद्री के ऊँचे शिखरों पर रणनीतिक स्थिति के कारण यह किला मराठों के लिए महत्वपूर्ण था। यह किला महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है।
8. सिंधुदुर्ग किला (कोकण, महाराष्ट्र)
सिंधुदुर्ग अरब सागर में एक द्वीपीय किला है, जो कोकण तट पर स्थित है। 1664 में शिवाजी महाराज ने इस किले का निर्माण किया। यह किला मराठा नौसेना का मुख्य आधार था और पुर्तगालियों, अंग्रेजों जैसी विदेशी ताकतों से कोकण तट की रक्षा के लिए उपयोग किया गया। 48 बुर्ज और गुप्त प्रवेश द्वारों के साथ यह किला मराठा नौसेना की शक्ति का प्रतीक है। किले पर शिवाजी महाराज का मंदिर है, जो भारत में एकमात्र है। यह किला ASI द्वारा संरक्षित है।
9. विजयदुर्ग किला (सिंधुदुर्ग, महाराष्ट्र)
विजयदुर्ग कोकण तट पर स्थित एक तटीय किला है, जो मराठा नौसेना की शक्ति के लिए प्रसिद्ध है। 1653 में शिवाजी महाराज ने इस किले पर कब्जा किया और इसका जीर्णोद्धार किया। यह किला मराठा नौसेना का महत्वपूर्ण आधार था और कई नौसैनिक अभियानों का केंद्र था। समुद्र में खाइयों का उपयोग रक्षा के लिए किया गया। यह किला ASI द्वारा संरक्षित है।
10. सुवर्णदुर्ग किला (दापोली, महाराष्ट्र)
सुवर्णदुर्ग कोकण तट पर एक द्वीपीय किला है। 1660 में शिवाजी महाराज ने इस किले पर कब्जा किया और इसे मराठा नौसेना के हिस्से के रूप में उपयोग किया। कोकण तट पर व्यापार और रक्षा के लिए यह किला महत्वपूर्ण था। समुद्र में रणनीतिक स्थिति के कारण यह किला मराठों के लिए महत्वपूर्ण था। यह किला ASI द्वारा संरक्षित है।
11. खांदेरी किला (मुंबई, महाराष्ट्र)
खांदेरी अरब सागर में एक द्वीपीय किला है, जो मुंबई के पास अलीबाग में स्थित है। 1679 में शिवाजी महाराज ने इस किले का निर्माण किया। मुंबई बंदर की रक्षा और अंग्रेजों व सिद्दियों के खिलाफ लड़ाई में यह किला महत्वपूर्ण था। समुद्र में एकमात्र प्रवेश द्वार के कारण यह किला अभेद्य था। यह किला महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है।
12. जिंजी किला (विल्लुपुरम, तमिलनाडु)
जिंजी तमिलनाडु में पूर्वी घाट में स्थित एक पहाड़ी किला है। 1677 में शिवाजी महाराज ने इस किले पर कब्जा किया। मराठों की दक्षिण भारत की मोहिमों और मुगलों के खिलाफ लड़ाई में यह किला रणनीतिक केंद्र था। तीन पहाड़ी शिखरों और मजबूत किलेबंदी के कारण यह किला मराठों के लिए महत्वपूर्ण था। यह किला ASI द्वारा संरक्षित है।
यूनेस्को मान्यता का महत्व
इन 12 किलों का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास और शिवाजी महाराज की दूरदर्शिता का सम्मान है। ये किले स्वराज्य, स्वाभिमान और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने इस उपलब्धि के लिए शिवाजी महाराज के अनुयायियों को बधाई दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। इस मान्यता से किलों के संरक्षण और संवर्धन के लिए अधिक प्रयास होंगे, साथ ही वैश्विक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
छत्रपती शिवाजी महाराज के 12 किलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान प्राप्त होना भारतीय इतिहास और संस्कृति का वैश्विक स्तर पर गौरव है। ये किले मराठा साम्राज्य की सैन्य शक्ति, स्थापत्य कौशल और शिवाजी महाराज की रणनीतिक दृष्टि के प्रतीक हैं। इन किलों ने स्वराज्य की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आज भी ये लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं। यूनेस्को की मान्यता से इन किलों का वैश्विक महत्व रेखांकित हुआ है, और इससे भावी पीढ़ियों को इस धरोहर के संरक्षण और संवर्धन की प्रेरणा मिलेगी।
संयुक्ता देशमुख
अध्यक्षा – सुदर्शना फाउंडेशन
मीडिया चीफ – इंटरनेशनल जिजाऊ ब्रिगेड