किसी भी स्थान, क्षेत्र और राज्य के हालात यूँ ही नहीं बदलतें है इनके पीछे बहुत सी वजह होती है और हो भी क्यूँ न देश के तमाम नागरिकों की समस्याओं का समाधान होने के बाद सुधार होने के बाद कही जाकर देश अन्तराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि तैयार करता है,उसमे सुधार करता है और तब जाकर एक पैमाना होता है जो उसे “तरक्की” हासिल करने वाला देश कहा जा सकता है .
बात यही पर ही नहीं खत्म होती है इसके बाद वहां की शिक्षा,स्वास्थ्य,कानून और प्रति व्यक्ति आय से लेकर वहां पर विदेश से कितना निवेश हो रहा है कितना व्यापार वहां हो रहा है और इसका कितना लाभ देश को मिल रहा है तब कही जाकर एक देश सम्पन्न होता है कामयाब होता है . लेकिन ये तमाम चीज़ें कहा उपलब्ध है ? कोनसे देश में ? जहाँ सब कुछ इतना उच्च स्तर का हो ? सवाल उठना लाज़मी भी है की ये सवाल उठें लेकिन ये मुमकिन है .
ये बिलकुल मुमकिन है की एक देश ऐसा है जो देश 1971 में आज़ाद हुआ था और आज इसकी सकल घरेलू उत्पाद आय विश्व में सबसे ज्यादा है,जहाँ पेट्रोल की तादाद इतनी है की दुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा उसी का पेट्रोल इस्तेमाल भी करते है .
ये देश 2022 में विश्व कप की भी मेजबानी करने वाला है,और ये मुल्क महज़ 45 वर्ष पहले आज़ाद हुआ है, ये मुल्क कोई वेस्टर्न मुल्क नही है बल्कि सऊदी के प्रायद्वीप पर मौजूद एक छोटा सा देश है जिसने सबसे कम वक़्त में सबसे ज्यादा कामयाबी हासिल करते हुए,एक नई पहचान बनाई है और ये अद्भुत उपलब्धी है . मगर सवाल ये है की ये हुआ केसे ? इसी का जवाब हम इस लेख में आगे आपको देंगे .
( क़तर की आज़ादी और पेट्रोल का सहारा )
1868 तक ब्रिटेन के अधीन मुल्क की रियासत को सम्भाल लें क्यूंकि ब्रिटेन उस वक़्त बड़ी शक्ति थी और उसे ऐसा शख्स चाहिए था जो इस रियासत को सम्भाल सकें,सुधार सकें और वही के अधीन रहते हुए पूरी ईमानदारी के साथ कार्य करें उसी वक़्त ब्रिटेन को शेख अल-थानी के रूप मिला जिनकी ही हुकुमत आजतक क़तर पर काबिज़ है और क़तर का इतिहास भी इन्ही के इर्द गिर्द घूमता भी है .

क्योंकि ये हालात शुरआती इसलिए गौर करें जाने वाली बात ये है की 1950 के दौर तक यहाँ भुखमरी जैसे हालात थे,लेकिन इस स्थिति के बिलकुल उलट जब सुधार की तरफ वो बढ़ा तो उसने बहुत बड़े और अहम सुधार भी खुद के भीतर किये लेकिन इसमें बहुत चीज़ें ऐसी थी जो ये बताने के लिए काफी थी की क़तर के नसीब में कुछ और ही लिखा है .
1950 के दौर में पेट्रोल और नैचुरल गेसेस की एक साथ खोज ने जैसे प्यासे को दरिया दे दिया और क़तर की किस्मत चमक गयी और और उसके हालात बदलते हुए नजर आने लगे लेकिन असल स्थिति में बदलाव तब हुआ जब 1971 में क़तर आज़ाद हुआ उसके बाद तमाम तेल और नेचुरल गेसेस का मालिक क़तर खुद बन गया था .
इसका इस्तेमाल उसने अपने हालात को बेहतर करने की तरफ कर दिया,हालात ये थे की पेट्रोल का बहुत बड़ा हिस्सा कतर में मिलने से इस मुल्क पर खतरा मंडराने लगे जो इसकी ज़मीन में मौजूद बेशुमार दौलत की वजह से थे,लेकिन तब तक क़तर अपनी तरक्की के लिए पहला कदम रख चूका था और असल मौका सामने आना अभी बाकी था,जिसने क़तर को बदल कर ही रख दिया और दुनिया में छा गया .
(“शहजादे की कूटनीति और निवेश ने क़तर को चमकाया)
1990 तक क़तर के हर एक फैसलें में उसके पड़ोसी मुल्क सऊदी अरब का बहुत बड़ा हस्तक्षेप रहता था,और हर बड़ा या छोटा फैसला सऊदी अरबी ही की मर्ज़ी से होता था, शेख खलीफा के सुपुत्र शेख हमद जो 1952 में पैदा में हुए थे और विदेश में पढाई करने के बाद अपनी एक समझ रखते थे. उनको ये बात जरा भी पसंद नही थी और उन्होंने यहाँ सुधार के लिए कुछ सोचा .

उन्ही ने ये भांप लिया था की अब सऊदी के आगे झुका हुआ और अकेले सा खड़े होकर देश की तरक्की कर पाना मुमकिन नही है . कुछ ऐसा करना बेहद ज़रूरी था जो सुधार की राह दिखाएँ . क़तर को वो बनाये जिसके वो लायक था ,शेख का ये सोचना बेहतर भी था .
क्योंकि तमाम उपलब्धता के बावजूद क़तर कही भी नही था , क्योंकि शेख हमद खुद भी वैचारिक और समझदारी के हिसाब से बेहतर थे और उन्हें इस बात का पता था की कब क्या सुधार करने है और किस कदम से क्या लाभ होगा और यही उनके लिए और उनके मुल्क के लिए तरक्की की बहुत बड़ी वजह भी बना .
इसी को ध्यान में रखते हुए बहुत सावधानी के साथ 90 के दौर में हालात का जायजा लेकर अपने पिता ही को सत्ता से बेदखल करते हुए क़तर की सत्ता हासिल की और ये वो टर्निंग पॉइंट था जिसने क़तर को असल मायने में एक नम्बर की फेहरिस्त में आने की राह दिखा दी और शेख हमद की पढाई और समझ ने मुल्क को तरक्की के नयी ऊंचाई पर ला खड़ा कर दिया .
शेख हमद ही के वक़्त में क़तर में विदेशी सैलानियों के लिए एक ऐसी जगह बनानी शुरू की गयी जहाँ वो यात्रा के लिए आ सकतें थे और क़तर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जानकारी के बारे में जान सकतें है,इससे भी आगे आये दिन और तमाम पड़ोसी मुल्कों के झगड़े और गृह युद्ध जेसी स्थितियों से भी अलग क़तर ने अपनी अलग पहचान बनाते हुए इस जगह को मिडिल ईस्ट में सबसे सुरक्षित स्थानों में से एक बनाया है,और ये उपलब्धि पाने वाले देशों में चुनिंदा है .
शेख हमद ने बिगड़े हुए ढांचे को सुधार कर इसमें सैन्य शक्तियों से लेकर निवेश और फिर शिक्षा के क्षेत्र में फ़्रांस जैसे मुल्को के साथ सम्बन्ध बनाते हुए मुल्क की तरक्की की राह खोली,विदेशी निवेश के लिए राह आसान की और सबका स्वागत करते हुए, एक मजबूती व्यवस्था खड़ी कर दी जिसने धीरे धीरे अपने पैर पसार कर तमाम मुल्कों के समक्ष जैसे चुनोतियों का पहाड़ खड़ा कर दिया .
इस पहाड़ की चोटी को छू पाना मुमकिन अब तक नही हो पाया है और यही वजह है की आज जीडीपी में क़तर विश्व के सबसे बड़े देशो से लेकर सबसे बड़े तकनीकी देशो की फहरिस्त में सबसे ऊपर नज़र आता है और ये अद्भुत कामयाबी है .

शेख हमद ने अपने यहाँ की तमाम चीजों का इस्तेमाल बेहतर तरह करना शुरू किया और उस पैसे ही इस्तेमाल उन्होंने मुल्क के अलग अलग हिस्सों में अलग शैलियों में लगाना शुरू कर दिया,और हाल ये हो गया की सुधार ने यहाँ राह पकड़ ली और क़तर कामयाबी के परचम लहराते हुए वो बना जिसका ख्वाब हर एक मुल्क देखता है .
उसकी प्रति व्यक्ति आय किसी भी मुल्क से आगे थी,उसके पास निवेशक थे और उसके पास बड़ी जगह के मुक़ाबले बहुत कम आबादी थी यही कारण है की फ़ोर्ब्स ने जब 2010 में क़तर को सबसे अमीर मुल्क घोषित किया तब वो अपनी आज़ादी के 40 साल पुरे कर रहा था मगर उसकी तरक्की 10 गुना थी .
(विश्व में अलग पहचान वाला मुल्क)
आज क़तर उस मुकाम पर पहुँच गया है आज उसके आस पास यानी उसकी प्रति व्यक्ति आय से लेकर,उसकी सुविधाओं से लेकर,और उसकी कुल आय तक बहुत कम मुल्क है,जो उससे बराबरी कर सकतें है और इसमें सबसे ज्याद हैरत में डाल देने की बात ये है की ये सब कुछ क़तर ने लगभग 45 साल में हासिल किया है,कतर ने अपनी आबादी से लेकर अपनी पहचान को और सहूलियत को और अपने आप को एक ऐसी पहचान दी है और क़तर उन बुलंदियों को छु रहा है जिसके शायद हर एक देश ख्वाब देखता है .
इस मुल्क ने सभी चीज़ों को बहुत बेहतर ढंग से सुधारते हुए उसे अपने हिसाब से किया,उसने धार्मिकता से लेकर अपने आपसी सबंध और फिर निवेशकों को न्यौता तक सभी के लिए एक स्थान तैयार किया तब जाकर क़तर विश्व सबसे अधिक जीडीपी प्राप्त कर पाया और बन पाया दुनिया का सबसे अमीर मुल्क और ये कमाल है अद्भुत है .
लेखक- असद शैख