देश में पहली बार जाति की गिनती होगी, सरकार ने 1 मार्च 2027 से जनगणना शुरू करने का ऐलान किया
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब देश में पहली बार जाति के आधार पर जनगणना की जाएगी। सरकार ने कहा है कि यह गिनती 1 मार्च 2027 से पूरे देश में शुरू होगी।
अब तक जनगणना में लोगों से उनकी उम्र, धर्म, लिंग और रहने की जगह जैसी जानकारी ली जाती थी, लेकिन अब इसमें जाति की जानकारी भी ली जाएगी। यह आज़ाद भारत में पहली बार होगा जब सरकार जाति की जानकारी भी दर्ज करेगी।

पिछले कुछ सालों से चल रही थी मांग
जातिगत जनगणना की मांग पिछले कुछ सालों से लगातार उठ रही थी।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, आरजेडी के तेजस्वी यादव, और जेडीयू के नीतीश कुमार जैसे नेता लगातार कह रहे थे कि सरकार को जातियों की असली संख्या पता करनी चाहिए।
राहुल गांधी ने संसद में भी कहा था कि अगर उनकी सरकार बनी तो वे खुद जातिगत जनगणना कराएंगे। अब इससे पहले ही मोदी सरकार ने यह फैसला ले लिया है।
1931 के बाद पहली बार
भारत में आखिरी बार जाति के आधार पर गिनती 1931 में हुई थी, जब देश अंग्रेजों के अधीन था।
आजादी के बाद से अब तक सिर्फ SC और ST (अनुसूचित जाति और जनजाति) की संख्या ही गिनी जाती रही है।
लेकिन अब सरकार OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) और बाकी जातियों की भी जानकारी लेगी।
इससे सरकार को यह पता चलेगा कि किस जाति की आबादी कितनी है, और उन्हें योजनाओं और मदद में कितना हिस्सा मिलना चाहिए।
इस फैसले से क्या बदल सकता है?
- सरकार को असली आंकड़े मिलेंगे, जिससे योजनाएं बेहतर बन सकेंगी।
- OBC समाज को उनके हक और हिस्से की सही जानकारी मिलेगी।
- राजनीतिक पार्टियां अब जाति के आधार पर अपनी रणनीति बना सकेंगी।
- कुछ लोगों को डर है कि इससे जातिवाद बढ़ सकता है, लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि इससे बराबरी आएगी।
राजनीतिक असर भी होगा
इस फैसले से राजनीति पर भी असर पड़ेगा।
विपक्ष इसे अपनी जीत मान सकता है, क्योंकि उन्होंने ही यह मांग उठाई थी।
वहीं सरकार इसे जनता के हित में उठाया गया कदम बता रही है।
2029 के लोकसभा चुनाव से पहले यह फैसला एक बड़ा दांव माना जा रहा है।
अब आगे क्या?
अब सभी की नजर इस बात पर है कि 2027 में होने वाली जाति की जनगणना से देश की योजनाएं, आरक्षण और राजनीति में क्या बदलाव आता है।